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Key monestry

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दोस्तो जैसा की आप सब जानते हो कि में कीह मठ के बारे में आप सब को बताने जा रही हूं तो दोस्तो अगर आप कीह मठ के बारे में बारीकी से जानकारी  चाहते हो तो आप मेरे ब्लॉग को पूरा पड़े जिसमें मैने कीह मठ के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देने की कोशश की है  जैसा कि आप इस अद्भुत मठ के अंदर कदम रखते हैं, आप इसकी खूबसूरत दीवारों को देखेंगे जो चीनी संस्कृति से प्रभावित 14 वीं शताब्दी की मठ वास्तुकला से युक्त भित्ति चित्रों और चित्रों से आच्छादित हैं। यह अपनी दुर्लभ पांडुलिपियों, अद्वितीय पवन उपकरणों, बुद्ध की मूर्तियों और हमलावरों को बचाने और मठ की रक्षा करने के लिए हथियारों का एक अद्भुत संग्रह के लिए भी लोकप्रिय है।  कीह मठ लाहौल जिले में एक बेहद प्रसिद्ध मठ है  यह मठ  एक खूबसूरत पहाड़ी पर स्थित है समन्दर तल से कीह मठ की ऊंचाई 4,166 मीटर यानी (13504 फीट) है ओर इस मठ को एक हज़ार साल पुराना बताया जाता हैं स्पीति घाटी का यह सबसे पुराना, जटिल ओर  बड़ा मठ हैं  इस मठ की स्थापना 13वीं  शताब्दी में हुई थी।  कीह का अर्थ होता है ( चाबी ) ओर ( मठ ) आश्रम ।          मठ का  इतिहास  कीह  मठ की स्थापना 11 वीं शता

lahol and Spiti valley

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 स्पीति घाटी  हिमाचल प्रदेश के राज्य में स्थित है यह   समन्दर तल से 12500 मीटर की ऊंचाई  पर है  स्पीति घाटी उच्च पर्वत और श्रृंखलाओं से गिरी हुई है स्पीति घाटी का अर्थ मध्य भूमि है अर्थात् भारत और तिब्बत के बीच की भूमि।  यहां का नजारा देखने पर्यटक दूर-दूर से आते हैं स्पीति घाटी  की खूबसूरत पहाड़ियां स्थिति को और ज्यादा खूबसूरत बनाती है लाहौल और स्पीति घाटी दोनों ही एक दूसरे से विभिन्न है। लाहौल घाटी की यात्रा के लिए परमिट प्राप्त करना बेहद मुश्किल है यहां की एक विशेष बात यह भी है कि  लाहौल ओर स्पीति की अपनी कोई मुख्य भाषा नहीं है यहां विभिन्न बोलियां बोली जाती हैं।यहां बौद्ध धर्म के लोग ज्यादा निवास करते है हिमाचल प्रदेश में किन्नौर ओर लौहोल स्पीति में ही ज्यादा बौद्ध धर्म के लोग निवास करते है। लाहौल शब्द को तिब्बती भाषा में (गार्जा) मतलब अज्ञात देश एवं मौन कहा जाता हैं  लाहौल घाटी में वास्तव में मिश्रित प्रजाति के लोग रहते हैं तिब्बती भाषा में लाहौल को लहोयुल   भी कहा जाता है तिब्बती शब्द लहोयुल  का अर्थ दक्षिणी देश से है  इसका अर्थ  है देवताओं का देश।   मठ का अर्थ मठ का अभिप्राय एक ऐ

Krishna Mandir yulla kanda

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 आज हम आपको किन्नौर के एक ऐसे अनोखे मंदिर के  बारे में बताने जा रहे हैं जोकि  में एक प्राकृतिक झील में  है जिस झील के अंदर श्री कृष्ण का एक अद्भुत मंदिर स्थित है यह कृष्णा जी का सबसे अधिक उंचाई वाला   मंदिर हैं। यह मंदिर(3,895) मीटर  तक का एक आध्यात्मिक ट्रैक हैं।  यह बहुत ही चौंकाने वाली बात है कि यह झील सबकी तकदीर तय करती है.  यहां जगह किन्नौर के  यूला कांडा में स्थित है यह मंदिर समंदर तल से  12000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यह  दुनिया का एक ही ऐसा  कृष्णा मंदिर  है जो कि एक झील के अंदर स्थित है। इस मंदिर में  पहले  केवल श्री कृष्णा जी की पत्थर की मूर्ति थी जिसकी पूजा पांडव किया करते थे पर अब वहां नयी मूर्ति स्थापित की गई  हैं  पांडवो ने बनाया मंदिर  पुराणिक मान्यताओं के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि इस झील में मंदिर का निर्माण पांडवो ने किया था  इस मंदिर की खासियत यह है कि यह केवल जन्माष्टमी के पर्व  पर ही खुला रहता है कहा जाता है कि पांडवों ने यह मंदिर श्रीकृष्णा जी के लिए बनाया था  और यह भी मान्यता है कि जो भी सच्चे मन से यहां जन्माष्टमी में दिन आता है और इस मंदिर में पूजा करता    है उ

रोहतांग अटल टनल

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  दुनिया की सबसे लंबी सुरंग 'अटल टनल' के नाम से  हिमाचल प्रदेश के रोहतांग में स्थित हैं  इस सुरंग की लम्बाई 9.02 किलोमिटर है। यह सुरंग समद्र तल से 10 हजार (यानी 3000 मीटर) 40 फीट की ऊंचाई पर स्थित है  यह दुनिया में सबसे लंबी और सबसे ऊंचाई पर बनी  राजमार्ग सुरंग  है जिसका उद्धघटन प्रधान मंत्री  नरेंद्रमोदी जी ने किया है यह उद्धघाटन शनिवार 3 अक्टूबर 2020 को प्रातः 10 बजे  किया गया। यह सुरग करीब 10.5मीटर चौड़ी और 5.52मीटर उंची हैं। रोहतांग दर्रे की सुरंग को अटल टनल का नाम क्यों दिया गया?  अटल बिहारी वाजपेई जब देश के प्रधानमंत्री थे तब 3जून 2000 को  अटल बिहारी बाजपेई जी ने रोहतांग दर्रे के नीचे रणनीतिक सुरंग का एक ऐतिहासिक निर्णय किया था यह अटल बिहारी जी का सपना था टनल की  आधारशिला 26 मई 2002को रखी गई थी तब केंद्रीय मंत्रालय की बैठक में अटल बिहारी जी को सम्मान के साथ इस टनल का नाम उनके नाम पे रखने का निर्णय लिया गया।और यह सुरंग आधुनिक तकनीक और संरचनाओं के साथ  साथ बनाई गई है जिसे की लेह- लद्दाख के किसानों, युवाओं और यात्रियों के लिए प्रगतिशील रास्ता खोल दिया है। अटल टनल(सुरंग) राजम

Kamro fort

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कामरू किला किन्नौर जिले  का सबसे ऐतिहासिक किला है यह किन्नौर जिला में सांगला से 1की0 मी0  की दूरी पर टुकपा घाटी में कामरू गांव  में स्थित है  जिसे यहां के लोग मोने भी कहते है। यह किला समंद्र तल से लगभग 2600मी की उंचाई पर स्थित है। देवदार की लकड़ी और पत्थरो  से बना यह किला 1100साल पुराना बताया जाता हैं।  किले का पहला द्वार लकड़ी का बना हुआ है जिस पे खूबसूरत नकाक्षी की गई है इस किले के मुख्य द्वार पर भगवान बुद्ध की एक प्रतिमा  बनाई गई है जो पर्यटको का स्वागत करती है   और  किले के प्रांगण में मां कामाख्या देवी जी का मंदिर भी है जिसे  लोगों के दर्शन के लिए बनाया गया है यह किला पत्थरो और लकड़ी  के साथ बना सात मंजिला भवन हैं।  किले के एक तरफ देवदार के पेड़ों का खूबसूरत नजारा हैं। और दूसरी तरफ उंचे - ऊंचे पर्वत का नज़ारा हैं  कामरू किले का इतिहास      कामरू किले का इतिहास बुशहर राजवंश से जुड़ा हुआ है। माना जाता है कि यह किला 1100साल पुराना है।साथ ही में किले के अंदर एक मंदिर है और है जिन्हे बद्रीनाथ मंदिर कहा जाता है इस मंदिर का इतिहास 15वी सदी का बताया जाता हैं।  इस मंदिर का इतिहास 15वीं सदी

Kinnar Kailash Trek

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किन्नर कैलाश महादेव किन्नर कैलाश महादेव का घर माना जाना है इसलिेए  यह स्थान  पूजनिय हैं यह किन्नौर मेंं स्तिथ है  किन्नर कैलाश पर्वत   की ऊंचाई  समन्दर  तल से 24 हजार फीट  है  किन्नर कैलाश के शिवलिंग की एक मुख्य विशेषता यह है कि यह शिवलिंग दिन में कई बार रंग बदलता है हिन्दू धर्म में आस्था मानने वाले लोग और जो लोग चोनौतपुर्ण ट्रैक करना चाहते है ये  उनके लिए यह उत्तम   स्थान है यह यात्रा  इतनी कठिन और दुर्गम है कि इस यात्रा को यात्री इसे अपने जीवनकाल में बस एक   बार  ही कर पाता है। यह यात्रा शुरू होने पर तीर्थयात्रियों के लिए विभिन्न प्रकार की सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।           किन्नर कैलाश का भगवत गीता में वर्णन  किन्नर कैलाश जो पुरणो में भी वर्णिंत है भगवत गीता में भी इस से   बहुत महत्व दिया गया है जिसके अंदर भगवान श्री कृष्ण ने हिमालय पर्वत को अपना घर बताते हुए हैं  कहां है कि मेरा निवास पर्वतों के राजा हिमालय में है' किन्नर कैलाश पर्वत पुरानी कथाओं में भी बहुत महत्व रखता है  किन्नर कैलाश पर्वत श्रृंखला  एक उद्गम स्थल है जहां से हमारी पवित्र गंगा नदी का उद्गम होता है   किन्नर कैलाश

sisma mata mandir in hindi

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एक ऐसा मंदिर जहां मात्र  सोने से हो जाती है  संतान की प्रापति   हिमाचल को  देव भूमि के नाम से ऐसे ही नहीं जाना जाता यहां पर बहुत  सारे मंदिर  है।  और  उन सब की अपनी  अपनी मान्यताएं है। उन्ही में से यह भी एक मन्दिर है हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के लड-भड़ोल तहसील के सिमस नामक खूबसूरत स्थान पर स्थित माता सिमसा मंदिर दूर दूर तक प्रसिद्ध है।  देवी सिमसा की स्थापना के पीछे ऐसी ही लोक मान्यता और विश्वास है जो इस मंदिर को एक अलग पहचान और महत्व दिलाता है. माँ देती है “सलिन्दरा” माता सिमसा या देवी सिमसा को संतान-दात्री के नाम से भी जाना जाता है. हर वर्ष यहाँ सैंकड़ो नि:सन्तान दंपति सन्तान पाने की इच्छा ले कर माता सिमसा के दरबार में आते हैं. माता सिमसा मंदिर में नवरात्रों में होने वाले इस विशेष उत्सव को स्थानीय भाषा में “सलिन्दरा” कहा जाता है. सलिन्दरा का अर्थ है स्वप्न अथवा ड्रीम नवरात्रों में महिलाएं सोती हैं फर्श पर नवरात्रों में नि:संतान महिलायें माता सिमसा मंदिर परिसर में डेरा डालती हैं और दिन रात मंदिर के फर्श पर सोती हैं. विश्वास है कि जो महिलाएं माता सिमसा के प्रति मन में श्रद्धा लेकर से