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दोस्तो जैसा की आप सब जानते हो कि में कीह मठ के बारे में आप सब को बताने जा रही हूं तो दोस्तो अगर आप कीह मठ के बारे में बारीकी से जानकारी  चाहते हो तो आप मेरे ब्लॉग को पूरा पड़े जिसमें मैने कीह मठ के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देने की कोशश की है  जैसा कि आप इस अद्भुत मठ के अंदर कदम रखते हैं, आप इसकी खूबसूरत दीवारों को देखेंगे जो चीनी संस्कृति से प्रभावित 14 वीं शताब्दी की मठ वास्तुकला से युक्त भित्ति चित्रों और चित्रों से आच्छादित हैं। यह अपनी दुर्लभ पांडुलिपियों, अद्वितीय पवन उपकरणों, बुद्ध की मूर्तियों और हमलावरों को बचाने और मठ की रक्षा करने के लिए हथियारों का एक अद्भुत संग्रह के लिए भी लोकप्रिय है।  कीह मठ लाहौल जिले में एक बेहद प्रसिद्ध मठ है  यह मठ  एक खूबसूरत पहाड़ी पर स्थित है समन्दर तल से कीह मठ की ऊंचाई 4,166 मीटर यानी (13504 फीट) है ओर इस मठ को एक हज़ार साल पुराना बताया जाता हैं स्पीति घाटी का यह सबसे पुराना, जटिल ओर  बड़ा मठ हैं  इस मठ की स्थापना 13वीं  शताब्दी में हुई थी।  कीह का अर्थ होता है ( चाबी ) ओर ( मठ ) आश्रम ।          मठ का  इतिहास  कीह  मठ की स्थापना 11 वीं शता

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कसोल को हम मिनी इजराइल के नाम से भी जानते  है।  क्यूंकि यहां आपको इजराइल के लोग और इजराइल की तरह बजार और इजराइल खाना सब मिल जायेगा यहां के रेस्टोरेंट में आपको मेनू कार्ड हिब्रू भाषा में मिलेगा। अगर आप हिमालयो की गोद में कुछ समय बिताना चाहते है तो ये  एक दम सही जगह है पार्वती नदी के किनारे बसा हुआ गॉंव कसोल  कुल्लू से महज 40 कि0मी0 की दुरी पर स्थीत है कसोल गॉंव एडवेंचर प्रेमियो के लिए बेहद  खास है। मानो ये जगह बैगपैकर्स के लिए स्वर्ग है। यहां सारा साल हजारो की संख्या में पर्यटक आते है। जो की प्रकृति के खूबसूरत नाजारो का लुत्फ़ उठाते है।  पार्वती घाटी दुनिया की खूबसूरत घाटियों में से एक है। 

 कसोल गॉंव पार्वती घाटी में पड़ता है। माना जाता है की भगवान भोलेनाथ ने इस घाटी में 3000 वर्षो तक ध्यान किया था

यह  घाटी पार्वती नदी और ब्यास नदी के संगमो पर शुरू होती है।  इस घाटी में घने जंगल है और  देवदार  ऊँचे पेड़ है जो की प्रकृति सुंदरता से निपुण है इन ऊँची उनकी सुंदर पहाड़ियों के बिच में बसा है कसोल गॉंव जो की ट्रेकर ,कैंपर, और बेगपैकर्स को अपनी और आकर्षित करता है तथा  आपको शांति का अनुभव होगा  

 पार्वती नदी 
बर्फ से ढकी पहाड़िया और देवदार के जंगलो की  हरयाली पार्वती नदी की सुंदरता को बढ़ाते है यह  पवित्र नदी है।  यहां पर  चहलकदमी, मंथन और एक तरफ पार्वती नदी और दूसरी तरफ देवदार के पेड, साफ़ सफ़ेद रेत और नीले  पानी से हरे-भरे घास को अलग करते हैं। नदी में हर मोड़ पाइन के पेड़ों, चट्टानों और झरनों के एक अलग ही सौंदर्यो का वर्णन करता है  । यह सब बर्फ से ढकी चोटियों के साथ क्षितिज पर खुश नीले आकाश को भेदते हुए बनाया गया है। उन तस्वीरों को लेने के लिए एक शानदार साइट जो आप अपनी दीवार पर दिखा सकते हैं। नदी में पानी की एक बड़ी ढाल और अधिक द्रव्यमान है, इसलिए यह शोरगुल वाली नदियों में गिरता है। पैदल चलकर भयंकर नदी को पार करना असावधानी है। उसके लिए लकड़ी का पुराना पुल है। ठंडे पानी में अपने पैरों के साथ नदी के बगल में बैठ कर  आप  एक अति सुंदर सुखद दोपहर का आनद ले सकते है । यह इस घाटी में बिताये गए सूंदर पलो में से एक है। 

 मणिकरण 
मणिकर्ण पवितर  जगहों में से एक है।  इस स्थान   पर आपको  शिव  मंदिर, राम मंदिर, गुरुद्वारा और गर्म पानी के झरना दिखेगा ये समुन्दर तल से 1760 मि की ऊंचाई पर स्थीत है।  जो  की पार्वती नदी के किनारे है।  नदी का पानी बर्फ के समान ठंडा होता है। मणिकर्ण अपने  गर्म पानी के झरने के लिए प्रसिद्ध है जो की नदी दाएं और स्थीत है जो की अध्भुत है। दुनिया के  महान  वैज्ञानिक भी इस रहस्यो को सुलझा नहीं पाए है। सर्दियों में बर्फ पड़ने के बावजूद पानी   के स्त्रोत गर्म ही रहते है। इस पानी में डुबकी लगाने के लिए दूर दूर से भक्त आते है। क्योंकि माना जाता है कि झरने के पानी में हीलिंग गुण होते हैं।

कैसे पहुंचे 
मणिकरण कसोल से लगभग 6 कि0मी दूर है, इसलिए आप एक राइड ले सकते हैं या सवारी कर सकते हैं, जो भी आपको सूट करता है।

पौराणिक  कथ्यो के अनुसार 
जब शिव और पार्वती  घाटी में टहल रहे थे, तो  देवी पार्वती ने  अपनी कान की बाली  गुम  हो गई और बहुत ढूढ़ने पर भी न मिली तो भगवान शिव को गुस्सा आ गया और भगवान शिव  ने अपनी तीसरी आँख  खोली और धरती को खत्म करने के लिए तांडव नृत्यों  करने लगे  जिसने दुनिया में कहर और अराजकता ला दी थी।

शिव को शांत करने के लिए, शेषनाग या नाग देवता  से  अपील की गई, जिन्होंने फुआंकार किया और इसने उबलते पानी के प्रवाह को जन्म दिया। क्षेत्र में फैले पानी ने अंततः खोए हुए गहनों को बाहर निकाला और इस स्थान को अपना नाम मणिकरण मिल गया।
सिख मान्यतओं के अनुसार उनके गुरु नानक देव जी यहां आये और वो लोगो के लिए खाना बनाना   चाहते  थे पर बहुत ढूंढ़ने पर जब उनको लकडिया  न मिली तो उन्होंने भगवान के आगे प्राथना की तो गर्म पानी का झरना उतपन हुआ 

मलाणा  गॉंव 

मणिकर्ण के बाद आप मलाणा गॉंव की यात्रा कर सकते है जो की प्राचीन गॉंव है। वहां के लोग अपने आप को  आर्यों के वंशज मानते हैं उनकी अपनी सरकार है और वे खुद को भारत सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं मानते हैं। माना जाता है कि मलाणा के ग्रामीण सिकंदर महान के यूनानी सैनिकों के वंशज हैं, फिर भी उनके अस्तित्व के कुछ निशान मिल सकते हैं यह परफेक्ट हॉलिडे डेस्टिनेशन 2,652 मीटर यानी समुद्र तल से लगभग 8,701 फीट की ऊंचाई पर स्थीत  है यह स्थान हरे-भरे वृक्षों और अविश्वसनीय घाटियों से घिरा हुआ है, जो इसे उन लोगों के लिए उपयुक्त बनाता है जो प्रकृति को इसके सबसे अच्छे सार से प्यार करते हैं। 

मलाणा में बोली जाने वाली पारंपरिक भाषा कनाशी है। इसके अलावा, बहुत कुछ इतिहास है जो इस खूबसूरत स्थान के अस्तित्व के पीछे है। स्थानीय पौराणिक मान्यतो  से पता चलता है कि श्रद्धेय ऋषि अर्थात् जमलू ऋषि इस स्थान पर निवासी थे और उन्हें मलाणा के अन्य नियमों के बीच नियमों, परंपराओं और संस्कृति को स्थापित करने के लिए प्रमुख श्रेय दिया गया है। स्थानीय लोग यहां तक ​​दावा करते हैं कि मलाणा दुनिया की सबसे पुरानी लोकतांत्रिक व्यवस्था के साथ-साथ एक अच्छी संसदीय प्रणाली को भी दर्शाता है। माना जाता है कि पूर्व-आर्यन काल के दौरान मलाणा को अपार सम्मान मिला था।।

मलाणा अपनी "मलाना क्रीम" के लिए प्रसिद्ध है, जो भांग के पौधों से बना एक उत्पाद है जो पार्वती घाटी में उगता है। मलाना क्रीम को उच्च शुद्धता वाला   हैश माना जाता है।

कैसे पहुंचे 
           कसोल से मलाणा की दूरी लगभग 21 किलोमीटर है । आपको अपने वाहन को सड़क पर पार्क करने की आवश्यकता है और  अब लगभग 1 कि0मी के लिए आपको मलाणा मुख्य सड़क से मलाणा गांव की ओर ट्रेक करने की आवश्यकता है। जो की हरे भरे पेड़ो  से भरा  है 

तोश गॉंव  
                तोश गॉंव जो की समुन्दर तल से 2400 मि. की ऊंचाई पर स्थीत  है। चारो और से पहाड़ो से घिरा है 
पार्वती  घाटी में स्थीत  ये गॉंव शोर शरावे    से एक दम  दूर है  
इज़राइली की तुलना में तोश में  अधिक यूरोपीय होते है  और इसकी हवा में भांग की लगातार फुहार के साथ। जंगल के माध्यम से ऊपर की ओर ट्रेकिंग, तोश तक पहुंचने के लिए एक छोटा मार्ग है। 200 रुपए के न्यूनतम शुल्क पर आपको वहां ले जाने के लिए कैब भी उपलब्ध हैं। आवास और भोजन सस्ते में   उपलब्ध हैं। आपको महान इज़राइली और यूरोपीय भोजन के साथ बहुत सारे कैफे और आराम करने के लिए आदर्श माहौल मिलेगा। हालांकि आप एक विशिष्ट भारतीय रेस्टुरेंट को खोजने के लिए कठिन होंगे। गाँव नदी और झरने के दृश्य के साथ एक पहाड़ी पर स्थित है। 

कसोल में अपने आगमन के बाद, आपको भरसैनी में तोश ट्रेक के शुरुआती बिंदु की यात्रा करनी होगी।

जब तक आप सुंदर घाटी और विशाल चट्टानों तक नहीं पहुंचते, तब तक तोश नदी का अनुसरण करें, क्योंकि यह देवदार के जंगलों में गहरी बहती है।

तोश को निर्देशित ट्रेक उन शिविरों तक समाप्त हो जाएगा जो भरसैनी से 1 KM दूर हैं।
लगभग 2.5 KM के तोश झरने तक ट्रेक कर सकते है 
वहां आप  बोनफायर और संगीत का आनंद लें।

 खीर गंगा का ट्रेक 


पौराणिक मान्यतो के अनुसार 
युगों पहले, शिव और पार्वती के छोटे पुत्र कार्तिकेय ने हजार विषम वर्षों तक यहां ध्यान किया था। किंवदंतियों के अनुसार, जब वह यहां थे, शिव और पार्वती कभी-कभी उनसे मिलने आते थे और माना जाता है कि पार्वती ने उनके लिए खीर (चावल और दूध का मिश्रण) बनाई थी, जो यहां बहने वाली गंगा नदी के दूधिया रंग की विशेषता है।

खीर गंगा समुन्दर तल से  3050 मीटर की ऊंचाई पर स्थीत है और  पार्वती घाटी के अंतिम छोर पर स्थित है

ट्रेक बरशैणी से शुरू होता है, और कुल ट्रेक की दूरी 12-13 मीकि0 है और खीरगंगा के शीर्ष बिंदु तक पहुंचने में लगभग 7-8 घंटे लगते हैं। 2,950 मीटर की ऊंचाई पर स्थित हॉट स्प्रिंग्स, भीषण ट्रेक के बाद आपको गर्म पानी में डुबकी लगाने के लिए लुभाएंगे

 ट्रेककर की आंखों और विशेष रूप से थके हुए पैरों के लिए खीरगंगा के मनोरम आकाश और विशाल हरियाली एक बहुत जरूरी है। यह गर्म पानी के झरने, भगवान शिव के एक छोटे से मंदिर और स्नानागार के साथ एक पवित्र स्थान है। यह किसी भी ट्रेकर को गर्म पानी के झरने में नहाने के लिए एक दुर्लभ संयोजन बनाता है जब सब कुछ बर्फ से डका होता है।

 तो आप भूतापीय वसंत को अपनी सभी प्रार्थनाओं के जवाब के रूप में पाएंगे। बस वह चीज जिसकी आपको जरूरत है जब आपके आस-पास की हर चीज मज़े कर रही हो। एक अद्भुत सुखदायक अनुभव के लिए गर्म स्नान में लेटें। यह लुभावनी सुंदरता के साथ एकजुट शांति है।  आसपास के आवास बहुत सस्ते आवास और उत्कृष्ट भोजन प्रदान करते हैं।

 इजरायली फूड ट्राई करें

एक हिप्पी स्वर्ग होने के अलावा, कसोल महान भोजन के लिए भी एक आश्रय स्थल है, जो बहुत कम ज्ञात है। जंगलों के बीच, दुनिया के एक दूरदराज के कोने में, कसोल में युवा इजरायलियों द्वारा झुंड लगाया जाता है। इसलिए नाम मिनी इज़राइल। यह प्रभाव हिब्रू में अंकित साइनबोर्ड और प्रचुर मात्रा में उपलब्ध इज़राइली भोजन में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। स्‍ट्रीटसाइड कैफे बेहतरीन भोजन परोसते हैं।   विशाल पहाड़ियों और गहरे हरे जंगलों का एक दृश्य आपके खाने के अनुभव को बेहतर बनाता है। इजरायली खाने के स्वाद के लिए 'फ़िरोज़ा कसोल' और 'द एवरग्रीन' आज़माएँ।

चलाल गांव

चलाल  कसोल के पास एक छोटा सा गाँव है। जैसा कि आप राजसी पहाड़ों, ग्रीश नदी की आवाज़, पक्षियों के चहकने और मारिजुआना के खेतों के लंबे खंडों द्वारा स्वागत किया जाता है, आपका स्वागत है। वैसे, मारिजुआना की खेती चायल के ग्रामीणों का प्रमुख व्यवसाय है। खरपतवार की खेती के अलावा, चालाल को ट्रान्स और साइकेडेलिक पार्टियों के लिए भी जाना जाता है।

 नदी के किनारे बसे और चारों ओर हरियाली का आनंद लें। थोड़ी देर के लिए आराम करें।  एक बार जब आप तरोताजा महसूस करते हैं, तो एक रोमांचक ट्रेकिंग के लिए समय निकालें। जैसा कि आप कसोल की गलियों से चलाल की ओर चलते हैं, कई इजरायली कैफे और दुकानों का गवाह है। यदि दिलचस्पी है, तो आप यहाँ से अपने स्मृति चिन्ह खरीद सकते हैं।  चलाल  की ओर चलना जारी रखें,   चलाल  तक का यह ट्रेक एक छोटा सा है और लगभग 2 घंटे तक चलेगा 



 खरीदारी

अगर आप यहां  की यादो को संजोना चाहते  है।  तो आप यहां के स्थानिय बाजार में अपनी इच्छा अनुसार खरीदारी कर सकते है। 

 संगीत समारोह में भाग लें सकते है 

ऐसी जगह के लिए जहां शांति अपने वातावरण के माध्यम से इंतजार कर रहे हैं, संगीत अपनी संस्कृति का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है। हर बार, कसोल में संगीत समारोह आयोजित किए जाते हैं, जो हालांकि बहुत ही मंद रूप से विज्ञापित होते हैं 

 रैव पार्टियों

भांग के उपयोगकर्ताओं और व्यापारियों के लिए एक वंडरलैंड के रूप में बदल रहा है, जो इजरायल का निवास स्थान है, जो पूरे वर्ष कई रैव पार्टियों का आयोजन करता है। यदि आप वर्ष के सर्वश्रेष्ठ महीनों के दौरान घाटी में हैं, तो आप ऐसे दलों का गवाह बनेंगे, जो दिनों के बीतने के साथ और कई देशों के नागरिकों के साथ जंगल में बदल जाते हैं। 


कैसे पहुंचे 
   कसोल हिमाचल प्रदेश के जिला कुल्लू में है।  जो की कुल्लू से 40  किमी  कि दुरी पर स्थीत है।  

निकटतम हवाई अड्डा  भुंतर में है जो कि कसोल से 30 कि0मी की दुरी पर स्थीत है। यहां से आप टैक्सी के माद्यम से कसोल पहुंच सकते है। 


आपको शिमला , दिल्ली , धर्मशाला , से आपको कुल्लू के लिये परिवहन विभाग की बस  मिल जाएगी  या आप यहां से कैब भी बुक कर सकते है। 

 हिमाचल प्रकृति की गोद में आराम करने के लिए अन्य महान पनाहगाह प्रदान करता है।







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