lahol and Spiti valley

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 स्पीति घाटी  हिमाचल प्रदेश के राज्य में स्थित है यह   समन्दर तल से 12500 मीटर की ऊंचाई  पर है  स्पीति घाटी उच्च पर्वत और श्रृंखलाओं से गिरी हुई है स्पीति घाटी का अर्थ मध्य भूमि है अर्थात् भारत और तिब्बत के बीच की भूमि।  यहां का नजारा देखने पर्यटक दूर-दूर से आते हैं स्पीति घाटी  की खूबसूरत पहाड़ियां स्थिति को और ज्यादा खूबसूरत बनाती है लाहौल और स्पीति घाटी दोनों ही एक दूसरे से विभिन्न है। लाहौल घाटी की यात्रा के लिए परमिट प्राप्त करना बेहद मुश्किल है यहां की एक विशेष बात यह भी है कि  लाहौल ओर स्पीति की अपनी कोई मुख्य भाषा नहीं है यहां विभिन्न बोलियां बोली जाती हैं।यहां बौद्ध धर्म के लोग ज्यादा निवास करते है हिमाचल प्रदेश में किन्नौर ओर लौहोल स्पीति में ही ज्यादा बौद्ध धर्म के लोग निवास करते है। लाहौल शब्द को तिब्बती भाषा में (गार्जा) मतलब अज्ञात देश एवं मौन कहा जाता हैं  लाहौल घाटी में वास्तव में मिश्रित प्रजाति के लोग रहते हैं तिब्बती भाषा में लाहौल को लहोयुल   भी कहा जाता है तिब्बती शब्द लहोयुल  का अर्थ दक्षिणी देश से है  इसका अर्थ  है देवताओं का देश।   मठ का अर्थ मठ का अभिप्राय एक ऐ

places to visit at kinnaur in hindi

 किन्नौर  जिला शिमला से 235 की0मी0 की दूरी पर स्थित है। यह जिला पहले महासू जिले के चीनी तहसील के नाम से जाना जाता था 1960 तक वर्तमान किन्नौर जिला, महासू  जिला की मिनी तहसील बना इसके  बाद  21 अप्रैल 1960 को किन्नौर हिमाचल प्रदेश का  छठा जिला बना। 

किन्नौर पर्यटन
हिमाचल प्रदेश के बारह जिलों में से एक, किन्नौर भारत-तिब्बत सीमा पर स्थित है। शिमला से 235 किमी की दूरी पर स्थित, किन्नौर, ज़ांस्कर घाटी, बर्फ से ढकी धौलाधार श्रेणी, चितकुल - इंडो-तिब्बत सीमा पर अंतिम गाँव और सतलुज, बसपा और स्पीति नदियों के दृश्य पेश करता है यहां हर वर्ष देश विदेश से पर्यटक किन्नौर की सुंदरता और ऐतिहासिक किलो और यहां की अनोखी और सुंदर संस्कृति को देखने के लिए आते हैं।
 
 तरंडा ढांक और मंदिर
  किन्नौर जिला का प्रवेश द्वार सराहन बुशहर का भीमाकाली मंदिर  है वहां से मा भीमकाली के दर्शन प्राप्त करने  के बाद हम निगुलसरी में तरंण्डा माता के दर्शन करेंगे जो की रामपुर बुशहर से 40की0मी0 की दूरी पर स्थित है यहां का इतिहास बहुत ही रोचक है कहा जाता है कि पहले रोड सिर्फ रामपुर बुशहर तक ही था 1963 में सेना के ग्रीफ विंग ने यह सड़क बनाने का काम शुरू किया था जब  सड़क का काम त्रंडा ढांक तक पहुंचा  तो वहां मजदूरों की  हर रोज पत्थर गिरने की वजह से मौत होने लगी इस वजह से मजदूर बहुत  परेशान हो गए इस बीच मजदूर  तरांडा गांव में बने मंदिर मां चित्रलेखा के  पास पहुंचे और देवी  से पूछने लगे फिर देवी ने बताया कि  यहां पर किसी शक्ति का प्रकोप है आप मुझे मेरे नाम का वहां मंदिर बना दीजिए और उसके बाद वहां सब कुछ ठीक हो जाएगा  और 1965 में सेना द्वारा यहां पर मंदिर साबित कर दिया गया तभी से यहां माता चित्रलेखा की पूजा होती है और माना जाता है कि जो यहां बिना माथा टेक के बगैर कोई गाड़ियां यहां से गुजरती है उसका एक्सीडेंट हो जाता है और उसके वापस लौटने की कोई उम्मीद नहीं रहती इसलिए यह जगह पर्यटकों के लिए और सभी निवासियों के   लिए बहुत पूजनीय है  धर्म के अलावा, किन्नौर में ट्रेकिंग और स्कीइंग जैसे साहसिक खेलों का भी बहुत बड़ा स्कोप है। ट्रेकिंग के लिए लगभग नौ ज्ञात मार्ग हैं और कुछ जो पाँच दिन या छह-दिवसीय यात्राएँ हैं। किन्नौर अपने स्वादिष्ट सेब, चिलगोजा, हथकरघा और हस्तशिल्प सामग्री के लिए अच्छी तरह से जाना जाता है।


 किन्नौर में घूमने  के उचित स्थान 


किनर कैलाश
किन्नौर की किन्नर कैलाश जो कि महादेव का स्थान है यह किन्नौर जिले का एक मुख्य आकर्षण है।
एक लंबी पैदल  यात्रा और चढ़ाई के लिए पवित्र पर्वत


बर की गुफा
संकीर्ण कण्ठ और बहने वाली नदियों के साथ गुफा है 

बोरसु पास
उच्च पर्वत दर्रा और प्राचीन व्यापार मार्ग

कामरू किला
पर्यटकों का एक मुख्य आकर्षण है कामरु किला एक प्राचीन लकड़ी का किला है यह हिमाचल प्रदेश के संगला के पास कामरू गांव का एक सुंदर किला है

रो पुर्गियल
राज्य की सबसे ऊँची अल्पाइन चोटी है 

बासपा घाटी
बासपा घाटी को हम सांगला घाटी के नाम से भी जानते हैं। बासपा नदी किन्नौर तिब्बत  को जोड़ती है यहां का नज़ारा बहुत मनमोहक है।
 
लमखागा ट्रैक किन्नौर
लमखागा दर्रे हिमालय में ऊंचाई वाले पर्वतो में से एक है यह 
5381मी0 की ऊंचाई पर है यह ट्रैक बहुत चुनौतिपुर्ण ट्रैक है।


 
मणिरंग पास ट्रैक
चढ़ाई और पहाड़ यहां की ऊंचाई 6593मी / 21625.04फीट है   इस दर्रे को भारतीय राज्य हिमाचल प्रदेश के सबसे ऊंचे पहाड़ों में से एक माना जाता है।

चरंग घाटी चितकुल पास
पहाड में से निकलता एक पतला  रास्ता  यहां सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है


 पनी का किला
अलंकृत लकड़ी के साथ स्मारक किले

रूपी भावा वन्यजीव अभयारण्य
रूपी भावा अभ्यारण 909मी की ऊंचाई पर स्थित है। यह 
अभ्यारण वनस्पतियों और जीव के विभिन्न प्रजतियों के लिए घर है
 



कृष्ण मंदिर, यूल कांडा
एक पौराणिक मंदिर जिसका निर्माण पांडवो ने किया था 
युलकुंडा झील दुनिया में श्रीकृष्ण का सबसे ऊंचा घर माना जाता हैं।




नारायण नागिनी मंदिर
यह मंदिर 5000वर्ष पुराना बनाया जाता है यह मंदिर दुर्गा मां को समर्पित है।

ब्रेलेंगी गोम्पा
मठ और मंदिर जो रेकोंगपियो के निकटतम स्थित है।

चंडिका देवी मंदिर
मंदिर जो कोठी गांव रेकोंगपियो- कल्पा के मध्य में बसा हुआ 
है


नाको गोम्पा
बौद्ध धर्म और हिन्दू धर्म दोनों के धार्मिक स्थानो के लिए जाना जाता है।

नाकॊ झील
नको झील बहुत पवित्र मानी जाती हैं और बहुत शांत और प्राकृतिक है।

नाको मठ पार्किंग
सार्वजनिक पार्किंग की जगह जहां आप अपनी गाड़ी 

भेलू टिब्बा (यम लोक)
पर्यटकों के आकर्षण और सुंदरता को प्रतीत करता है

रूपिन पास
हिमालय के माध्यम से लंबी पैदल यात्रा मार्ग

बुरान पास
पहाड में से निकलता रास्ता है। 



किन्नौर से ग्रेटर हिमालयन रेंज
किन्नौर से ग्रेटर हिमालयन रेंज और धोलाधार यहां के तीन उंच्च पर्वत श्रृंखलाएं है सतलुज किन्नौर की मुख्य नदी है और स्पीति, बसपा इसकी सहायक नदियां है।
 

छीतकुल
छितकुल (3450 मी): यह बासपा घाटी में अंतिम और सबसे ऊंचा गांव है।

कोठी माता मंदिर
 कोठी को कोस्टमपी भी कहा जाता है जो रिकांगपिओ के पास बसा हुआ है









इन स्थानों के बारे बारे में उचित जानकारी आपको आने वाले लेखो  में मिल  जाएगी इस लिये blog को  फॉलो क्र कर ले और हमारे  जानकारी आप तक जल्दी  हमे इंस्टा पर बी फॉलो कर  ले 

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