Krishna Mandir yulla kanda

 आज हम आपको किन्नौर के एक ऐसे अनोखे मंदिर के  बारे में बताने जा रहे हैं जोकि  में एक प्राकृतिक झील में  है जिस झील के अंदर श्री कृष्ण का एक अद्भुत मंदिर स्थित है यह कृष्णा जी का सबसे अधिक उंचाई वाला   मंदिर हैं। यह मंदिर(3,895) मीटर  तक का एक आध्यात्मिक ट्रैक हैं।  यह बहुत ही चौंकाने वाली बात है कि यह झील सबकी तकदीर तय करती है.  यहां जगह किन्नौर के  यूला कांडा में स्थित है यह मंदिर समंदर तल से  12000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यह  दुनिया का एक ही ऐसा  कृष्णा मंदिर  है जो कि एक झील के अंदर स्थित है। इस मंदिर में  पहले  केवल श्री कृष्णा जी की पत्थर की मूर्ति थी जिसकी पूजा पांडव किया करते थे पर अब वहां नयी मूर्ति स्थापित की गई  हैं 



पांडवो ने बनाया मंदिर

 पुराणिक मान्यताओं के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि इस झील में मंदिर का निर्माण पांडवो ने किया था  इस मंदिर की खासियत यह है कि यह केवल जन्माष्टमी के पर्व  पर ही खुला रहता है कहा जाता है कि पांडवों ने यह मंदिर श्रीकृष्णा जी के लिए बनाया था  और यह भी मान्यता है कि जो भी सच्चे मन से यहां जन्माष्टमी में दिन आता है और इस मंदिर में पूजा करता    है उसकी मनोकामना अवश्य ही पूर्ण होती हैं स्थानीय लोगो का यह भी कहना है कि युल्ला के ग्रामीणों ने कुछ समय पहले इस झील के पानी को खेत की संचाई के लिए नहर बनाने की कोशिश भी की थी लेकिन नहर का पानी वापस झील की तरफ मुड़ा हुआ था ये कैसे हुआ इसका रहस्य कोई जान नहीं पाया जब इस झील के पानी को मोड़ने की बात देवताओं से पूछी गई तो उन्होंने कहा कि यह झील बहुत पवित्र है  और इस झील के पानी के साथ कोई भी छेडखानी ना कि जाए



किन्नौर की शान टोपी 

किन्नौर की शान किन्नौर की  टोपी का यहां बहुत महत्त्व है मंदिर के साथ ही  एक पवित्र झील है और इस झील की मान्यता यह है कि यहां किन्नौर की टोपी को उल्टी कर इस झील की जलधारा में बहाया जाता है और माना जाता है कि इस की ज़ल धारा में यदि टोपी तेर गई और डूबी नहीं तो उस भक्त की मनोकामना अवश्य पूर्ण होती हैं और उस व्यक्ति का आने वाला साल अच्छा रहेगा और यदि डूब गई तो ऐसा  माना जाता है कि उसका आने वाला साल अशुभ माना जाता है  तो वह भक्त मंदिर में पूजा अर्चना  कर भगवान  से माफी मांगते है और आने वाले साल के अच्छे की कामना करते है  दंत कथाओं के अनुसार  इस मंदिर ओर झील की खासियत यह भी है कि इस झील के चारो ओर बौद्ध धर्म की पवित्र पतीकय(दारछवद) लगाई गई है जो इस झील और इस मंदिर की खूसूरती को चार चांद लगाती है



 जन्माष्टमी पर्व 

 जन्माष्टमी के पर्व पर यहां  प्रत्येक वर्ष एक जिला स्तरीय मेला आयोजित किया जाता है जिसमें किन्नौर के वासी और बौद्ध धर्म के लोग एकत्रित होते हैं जन्माष्टमी के दिन सुबह सारे गांव वासी भी एकत्रित होते है और यहां के पुजारी 16 रंगो के फूलों को इकट्ठा कर पूजा करते है और भक्त जनो में भांट देते हैं यहां जन्माष्टमी का उत्सव बड़े ही धूम धाम से मनाया जाता है।  सब श्री कृष्णा जी के भजन कीर्तन करके श्री कृष्णा जी को प्रसन्न करते हैं  यहां पर जन्माष्टमी का पर्व  बुशहर रियासत से भी  जुड़ा हुआ है  मान्यता है कि बुशहर रियासत के राजा केहरी सिंह  जी के समय से यहां यह पर्व मनाया जाता है 




कैसे पहुंचे 

आपको युला कांडा के लिए शिमला या चंडीगढ़ से आसानी से बस और टैक्सी के माध्यम से आसानी से सफर कर सकते है आपको यहां से एचआरटीसी कि बस के माध्यम से कम खर्चे पर किन्नौर की वादियां घूम सकते है आप शिमला से किन्नौर की कोई भी बस में सफर कर सकते हैं फिर पर्यटक को किन्नौर के  टापरी स्टेशन तक लगभग 200कि0 मि0 की यात्रा करके वहां पहुंचना होता है टापरी स्टेशन से शाम 4बजे से पहले बस लेनी होती है और उर्नी गांव को पार कर यूल्ला पहुंचते हैं। एक दिन वहां रुकने के बाद दूसरे दिन युल्ला कांडा के लिए लगभग 7की0 मी0 की चड़ाई को पार करना होता है वह चाड़ाई पार करने के बाद आपको युल्ला कांडा के श्री कृष्णा मंदिर जी के दर्शन प्राप्त होंगे



जरूरी सूचना 

युल्ला कांडा को जाने के लिए तीन रास्ते है मुख्य रास्ता एक ही है रास्ता ना भटके कृपया अकेले ना जाएं यदि आप रास्ता भटक गए तो जंगली जानवरों का शिकार भी हो सकते हैं ये ट्रैक केवल जन्माष्टमी के पावन पर्व पर ही करे और समय यह ट्रैक बंद रहता हैं



 खाने की सुविधा

खाना  की सुविधा  युल्ला केमटी के द्वारा आयोजित कि जाती हैं किन्तु आप रास्ते में खाने के लिए कुछ आवशयक़ चीजे ले जाना ना भूले



 धन्यवाद

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