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places to visit at kinnaur in hindi

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किन्नौर  जिला शिमला से 235 की0मी0 की दूरी पर स्थित है। यह जिला पहले महासू जिले के चीनी तहसील के नाम से जाना जाता था 1960 तक वर्तमान किन्नौर जिला, महासू  जिला की मिनी तहसील बना इसके  बाद  21 अप्रैल 1960 को किन्नौर हिमाचल प्रदेश का  छठा जिला बना। 
किन्नौर पर्यटन हिमाचल प्रदेश के बारह जिलों में से एक, किन्नौर भारत-तिब्बत सीमा पर स्थित है। शिमला से 235 किमी की दूरी पर स्थित, किन्नौर, ज़ांस्कर घाटी, बर्फ से ढकी धौलाधार श्रेणी, चितकुल - इंडो-तिब्बत सीमा पर अंतिम गाँव और सतलुज, बसपा और स्पीति नदियों के दृश्य पेश करता है यहां हर वर्ष देश विदेश से पर्यटक किन्नौर की सुंदरता और ऐतिहासिक किलो और यहां की अनोखी और सुंदर संस्कृति को देखने के लिए आते हैं।  तरंडा ढांक और मंदिर   किन्नौर जिला का प्रवेश द्वार सराहन बुशहर का भीमाकाली मंदिर  है वहां से मा भीमकाली के दर्शन प्राप्त करने  के बाद हम निगुलसरी में तरंण्डा माता के दर्शन करेंगे जो की रामपुर बुशहर से 40की0मी0 की दूरी पर स्थित है यहां का इतिहास बहुत ही रोचक है कहा जाता है कि पहले रोड सिर्फ रामपुर बुशहर तक ही था 1963 में सेना के ग्रीफ विंग ने यह सड़क ब…

shikari kali temple rampur

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शिकारी काली   शिकारी काली मां का मंदिर देव भूमि में जिला शिमला के रामपुर बुशहर में नोगवेली (जगुनि) की चोटी पर स्थित है मां शिकारी काली  2740 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है यहां के नज़ारे ओर माता के चमत्कारों की चर्चा दूर दूर तक की जाती है। पहाड़ों के अनुसार ऊंचाई वाले स्थान पर  जहां पर भी माता विराजमान होती है उस जगह को शिकारी (hights)  कहते हैं
 हिमालय में एक ऐसा मंदिर जहां सिर्फ एक ही काली विराजमान नहीं है।  यह एक ऐसा मंदिर है जहां एक साथ सात कालियां विराजमान है स्थानीय लोगो के अनुसार  ऐसा कहा जाता हैं कि  इस मंदिर में माता का केवल एक ही रूप विराजमान नहीं है यहां माता के साथ सात कालीयां विराजमान है  जो भी यहां  सचे मन से प्रार्थना करता है उसकी मनोकामना जरूर पूरी होती है। 


  आदमखोरो (मावी लोगो) की कहानीपुरातन काल के अनुसार बहुत से गांव में से एक यह भी  ऐसा गांव हुआ करता था जहां कभी  आदमखोरो  का कहर  हुआ करता था। जो इंसानों का भक्षण करते है। आदमखोर को नरभक्षी और खानाबदोश भी कहा जाता है नर भक्षी एक ऐसा कृत्य या अभ्यास है जिसमें एक इंसान दूसरे इंसान का मांस खाया करता था। और खानाबदोशी का अर्थ …

Shali ka tibba

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एक ऐसा मंदिर जो की बहुत ही खुबसूरत होने के बावजूद भी दुनिया की नजरो से बहुत दूर है और उसकी प्राकृतिक सुंदरता और एकांत जो की आपके मन को मोह लेगी साथ ही साथ   आपको अलग ही शांति का असीम सुख प्राप्त करवाएगी शाली के टीबा  मां भीमकाली को समर्पित को समर्पित एक दिव्य मंदिर है इस दिव्यता को देखने यहां पर्यटक दूर- दूर से आते हैं।                                जिसे लोग जन्नत कहते है                                वहीं जन्नत पहाड़ों पर आकर नसीब                                  हो जाया करती हैं
  शाली का टिबा     हिमाचल  प्रदेश के जिला शिमला के ठियोग में  स्थित  है। शाली का टीबा हिमालय   की गोद में  एक पहाड़ी पे बसा है  इस मंदिर का  नज़रा  बहुत खूबसूरत हैं। यह शिमला से 65 की0 मी0 की दूरी पर है यह हिमालय रेंज का एक विहगमदृष्य  प्रदान करता है  शाली का टीबा का ट्रैक( 2872m ) का है यह मंदिर माता भीमकाली को समर्पित है। माता शाली का एक और स्थान भी है जो उनके मुख्य स्थान से 2 की0 मी0 नीचे है 

  शाली के टीबे का वीहगम दृश्यशाली का टिब्बा एक ऐसी चोटी है जिसको भुला पाना मुश्किल है  शाली के टीबे के चारो  त…

bhimakali temple sarahan

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भीमाकाली काली मंदिर हिमाचल प्रदेश के राजधानी शिमला के सराहन में बसा हुआ है यह मंदिर रामपुर बुशहर से करीब 30की0मी की दूरी पर है और शिमला से यही मंदिर 180कि0मी दूर है। इस मंदिर की कलाकृति किसी का भी मन मोह लेती है यह एक प्राचीन भारतीय दरोहर है इस मंदिर का  वातावरण मन को  शांति प्रदान करता है यह मंदिर यहां 800साल पुराना बताया जाता है। मां भीमकाली  पूर्ण बुशहर राज्य के  शासक की देवी है यह समन्द्र तल से 2400 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। भीमकाली मंदिर हिन्नदुओ के लिए एक प्रमुख तीर्थ स्थल माना जाता हैं सराहन बुशहर का पुराना नाम शोणितपुर था माना जाता है कि यह पहाड़ कभी पृथ्वी से 20की0मी  नीचे था और यहां चारो और पानी था। हिमाचल का यह धर्मस्थल अति प्रिय है। यहां माता के दर्शन करने लोग दूर दूर से आया करते है यह अनोखा  मंदिर  सुंदरता ओर पुरानी संस्कृति का प्रतिक है।
 मां का नाम भीमाकाली कैसे पड़ा  हिमाचल प्रदेश 1996 में भीम राज्य बना था। और तब यहां महेश्वर देवता मंदिर की स्थाई प्रति कृति बनाई गई थी मां ने यहां भीम का रूप धारण कर राक्षसों का वध किया था तब से मां भीमाकाली  के नाम से जानी जाती हैं। मां…

shrikhand mahadev trek in hindi

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श्री खंड महादेवजय भोले दोस्तो। आइए हम वर्णन करते है श्रीखंड महादेव ट्रेक श्रीखंड महादेव  भगवान भोलेनाथ जी का निवास स्थान माना जाता है। जो की महादेव के भक्तो के लिये अतुल्नीय स्थान है  ये समुन्दर तल से 5227 मीटर यानी  17150 फ़ीट  की ऊंचाई पर स्थीत है। यह ट्रेक बहुत ही खुबसूरत  है   यहां की कहानी बड़ी ही रोचक है  दृढ़  इच्छा शक्ति वाले लोग ही इस यात्रा को पूरा कर पाते है। यकीन मानो मैने इस ट्रैक को बहुत कड़ी मशकत से पूरा किया है पर इस यात्रा को बहुत कम लोग ही पूरा कर सकते हैं। पर मुझे पूरा यकीन है यदि आप भी हिम्मत ओर जज्बे के साथ दर्शन पाने की इच्छा रखते हो तो आप  आप भी इस ट्रेक को पूरा कर सकते हैं। इस ट्रैक पर हमने ठण्ड  का ओर बड़े - बड़े  ग्लेशियर  तेज तर्रार झरने बड़े - बड़े पथरो का सामना किया है आपको यहां बहुत किसम की जड़ी बुटिया  और आपको  चारो ओर हरियाली  देखने को मिलेगी जो यहां की खूबसूरती को चार चांद लगाती है ऐसा लगता है मानो जैसे जन्नत मिल गई हो यहां पर आपको कही बर्फ के गलेशियर , कहीं पेड़ पोधे,कहीं पत्थरों से भरा, तो कहीं फूलों से भरी पहाड़ी,    ब्रहम  कमल जैसे  फूलो के  नज़ारे देख…